Thursday, 28 May 2015

अंबर

“Mr. Jha, your leave has been sanctioned. You can proceed for leave. Have a great journey.” इ ई-मेल पढैते सुमनजी के मोन खुशी से मयुर सन नाच लागल । सुमनजी नोयडा क एकटा इंजिनियरिंग कालेज में बीटेक(ईसीई) प्रथम सेमेस्टर के छात्र छलाह । दुइए मास पहिने त हिनकर एडमिशन एत भेल छलैन, किंतु ओ अपन क्षेत्र सं पहिल बेर बाहर आयल छलैथ आ इंजिनियरिंग में प्रवेश के बाद इ पहिल दूर्गापूजा ! गाम कोना नै जायब ! आ गामों में त मां-बाबू-बहिन, दोस्त-महिम सेहो सब त आंखि पाथने अछि हिनका देख लेल । ई सब सोचैत-सोचैत सुमनजी के पुरना गप्प सब मोन पर लगलैन ।
बचपने सं ओ एकटा औशत मेधा के छात्र छलाह । साधारण परिवार के बालक, आ घर में पढ में सभसं बेस होसगर । स्वाइत परिवार आ सर-कुटुमैति में लोक सब हिनका में बाबू-इंजिनियर आदि बन के आश लगाब लागल । जखन इ मैट्रीक क परीक्षा प्रथम श्रेणी में निक नंबर सं उत्तीर्ण केलैथ त ओ आश के बल भेटल आ हिनका सीएम साईंस कालेज में इंटर(गाणित) संकाय में प्रवेश भेट गेलैन । इंटर क पढाई के दौरान हिनका में इंजिनियरिंग कर के महत्वाकांक्षा बलवंत होइत गेल । ओ दरिभंगा में एकटा कोचिंग सेहो पकैर लेलैथ आ १२वी के परीक्षा संगे जेईई(मेन) के परीक्षा में सेहो बैसलाह । किंतु औशत छात्र के विडंबना होई अछि कि ओ नै आरे होइ अछि आ नै पारे ! जेईई(मेन) में ठीक ठाक कहल जाइ बला रैंक भेटक छलैन्ह किन्तु एतेको निक नै जे जेईई(एड्वांस) के लेल उत्तीर्ण कहल जाय अथवा एन.आई.टी अथवा कोनो अन्य टाप इंजिनियरिंग कालेज में प्रवेश भेटैन्ह । अत: हिनको लग वैह विकल्प छल जे बहुत पाछां रैंक बला सब के लेल सेहो खुजल छल, अर्थात अन्य प्राईवेट इंजिनियरिंग कालेज ।
यद्यपि हिनका इहो देखना गेलैन जे हिनका सं बहुत पाछु रह बला एसी/एसटी कोटा के क्षात्र सब के एन.आईटी में प्रवेश भेट रहल छल। इ बात हिनका दूध में मांछी सन बुझना गेल छल । हिनकर मोन कुंठित होमय लागल छल । ताहिपर सं परिवार-समाज क प्रश्नवाचक द×ष्टी हिनका आर बेसी विचलित करय लगलैन । किछु गोटे राय देलखिन जे एहि बेर छोड़ आ पटना/दिल्ली जा क तैयारी कर ग, अगिला बेर आईआईटी/एन.आईटी में एडमिशन भैये जेत । सुमनजी के मोन एहि उहापोह में छल ताहि बीच हुनका यार कक्का सं भेट भ गेलैन जे छुट्टी में गाम आयल छलैथ । ओ हिनका बुझेलखिन जे हौ, तोहर जे स्थिति छ: ताहि में कोन गारंटी जे अगिला बेर तोरा आईआईटी/एन.आईटी में एडमिशन भैये जेत ? आ जौं नै भेटल त इंजिनियरिंग कर के सपनो पर कुठाराघात भ सकै छ: । ताहि सं निक अछि जे तोहर रैंक निक छ: आ कोनो नीक प्राईवेट इंजिनियरिंग कालेज में ईसीई/सीएस आदि संकाय में प्रवेश भेट जेत। आ एहन ठाम प्रवेश भेला पर एजुकेशन लोन भेटबा में कोनो भांगट नै रहत। आ ओहि सलाह के परिणामस्वरूप आई सुमनजी एत बीटेक क रहल छैथ । इ सब सोचैत सोचैत सुमनजी के पता नै कखन आंखि लागि गेलैन ।

नियत समय पर सुमनजी गाम पहूंचला । गाम में यार-दोस्त, मां-बाबू-बहिन-पितियाइन सभ सं भेंट कय क मोन हर्षित भेलैन । यार दोस्त में कनि हवा-पाईन सेहो छोड़लैथ किंतु एन.आई.टी में प्रवेश नै भेटै के कुंठा अखनों धरि कहीं हिनका मोन में अटकल छल जे कखनो क हिनका मोन के विचलित क देइत छलैन ।
सतमी के सांझ में ओ दुर्गास्थान मेला में गेलैथ त अचानक हिनकर नजैर एकटा श्यामवर्णीय ६ फ़िट के छौंरा पर गेल जे फ़ुकना-पिपही बेच रहल छल । ’अंबर’ यैह नाम छल ओकर । अचानक ओकरा एहि अवस्था में देख सुमनजी के ह×दय द्रवित आ ग्लानित होमय लागल । ओ ओकरा सं नजैर चोरा क एम्हर आम्हर घुमय लगला किन्तु ध्यान हिनकर ओकरे पर टांगल छल । पुन: किछु पुरान गप्प मोन पड़ लगलैन ।
ओ स्कूल में हिनके संगे पढै छल, किन्तु १०वी के बाद कहियो भेंट नै भेल छल । भगवान जनैथ मैट्रीक पासो केने छल कि नै ! ओ बचपने सं लंबा छल, पैघ-पैघ केस राखै छल, श्यामवर्णीय छल आ देख में खास नै छल, किन्तु तैयो स्कूल में ओ अपना के अमिताभ बच्चन कहै छल, आ स्वाईत आनो बच्चा सब ओकरा व्यंगात्मक रूप सं या डरे अमिताभ बच्चन कहै छल । ओहो Schedule Cast छल आ पढै में बज्र भुसकौल (शायद अपन परिवेश के कारण अथवा शायद भगवान ओकरा ओहने बनेने छलखिन) । तथापि ओकरा stipend भेटनाई ओहि समय में हिनका समझ में नै आबै छल । आइ ओकरा ऐ स्थिति में देख क सुमनजी के मोन में होमय लागल जे कदाचित एकर कोनो मजबूरिए हेतै जे इ पढ के बयस में इ छोट छिन धंधा क क जीविका कमेबाक प्रयास क रहल अछि ! दू-चारि दिन बाद बाजार जैबा क क्रम में ओ फ़ेर सुमनजी सं टकरा गेल । सुमनजी कन्नी काटि क निकैल जाय चाहय छलखिन किन्तु अंबरे हिनका टोकलक : - “की दोस कि हाल चाल?” फ़ेर कुशल-क्षेम के बाद गप्प क क्रम में ओ बतेलक जे “कि बताबियौ दोस, पढ में त हम कहियो ठीक छलियौ नै। कहुना थर्ड डीविजन से मैट्रीक पास केलौं तै के बाद बाबू सुशील डाक्टर साहब लग काज पर लगा देलकौ ओत्तै साफ़-सफ़ाई के काज करै छी आ कंपाउंडरी सेहो सीख रहल छी । तों त आब मस्त इंजीनियरिंग क रहल छैं, आ करौ किए नै, बचपने सं पढै बला बच्चा छलैं” इत्यादि । गप्पक क्रम में सुमनजी के मन:स्थिति सामान्य होइत गेलैन आ अंतत: ओ ओकरा सं फ़ुकना बेचै बाली बात पुछिए लेलैथ। ओ उत्तर देलक: “देखही दोस, हम भेलौं मुर्ख गरीबहा लोक, ई मेले-ठेले में त दू टा उपरी आमदनी कमाय के मौका होई अछि से मौका कोना क गंवाबी । आ बात जहां धरि इन्जोय कर के अछी त मेला में उपस्थितिए इन्जोय के गवाही बनि जाय अछि । किछु लोक मेला में खरीद क इन्जोय करै अछि, हमरा सन लोक बेच क ।
अंबर सं बात केला उत्तर आ ओकर खुशगवार मिजाज देख के पश्चात सुमनजी के आत्मग्लानी समाप्त भ गेल छल । ओ सोचै लागल जे अंबरा के परिस्थिति जे भी देलकै अछि ओकरा ओ अपन मौका बुझि सहर्ष स्वीकार केलक अछि आ आनंदपूर्वक अपन कर्म क रहल अछि । त परिस्थिति हमरा त एकरा सं बड्ड निक मौका देने अछि अपन कर्म कर लेल आ अपना आ समाज के बहुत किछु देब लेल । आब सुमनजी के आत्मा सं आईआईटी/एन.आई.टी में प्रवेश नै भेट के बोझ सेहो उतरि गेल छल । ओ प्रण केलैथ जे ओ बीटेक के पढाई परम लगन सं करता आ अपना के पैघ सं पैघ मुकाम पर स्थापित कर के प्रयत्न में कोनो भांगट नै रह देथिन । संगहि एससी/एसटी के प्रति वैमनस्य के भावनों समाप्त भ गेल छल । सुमनजी के आब इ एहसास भ गेल छल जे ’अंबर’ सन कतेको अछि जे परिवेश के मारल अछि आ एहन लोक के किछु विशेष सुविधा भेट में कोनो अतिस्योक्ति नै अछि । आब हिनकर मोन ओहिना शांत आ ताजा भ गेल छल जेना बवंडर के बाद मेघ पड़ला उत्तर सब साफ़ आ ताजा भ जाई अछि ।
०४.०५.२०१५

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