Friday, 18 May 2018

जतय मोन ततै हम.....एकदा....टाइम मशीन (Ekda....Time Machine)

काशी नगरी में दू टा संगी रहै छलाह मोहन अमित. दुन्नु गोटे में घुट्टासोहैर मित्रता छलैन्ह. रहनाय-खेनाय, हँसनाय-काननाय सभटा एक्कै संगे होय छलैन्ह. एक बेर के गप्प ऐछ, बाबा विश्वनाथ के दरबार में एकटा बड़का कीर्तन के कार्यक्रम रहल छल. दुन्नु संगी नियारलैथ जे "की दोस, अपनो सब चलैत छी आई राइत बाबा के दरबार में कीर्तन के लेल."

दुनू संगी नियत समय पर बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाबय लेल विदा भेलाह. बाट में एकटा गणिका के कोठा छलै. देख मोहन के मोन भटकै लागल. बाजल "यौ मीता सुनु ने बाबा विश्वनाथ कोनो भागल जा नै रहलाह अछि कीर्तन भजन चलते रहैत अछि, से किएक ने आई राति एहि गणिका के दरबार में जा लहरिया लूटल जाय ही ही ही." सुनि अमित हुनका बोकियाबैत बाजल "ईह! शिव..शिव..शिव..शिव. चललहुँ अछि बाबा दरबार में हाजरी देबय लेल बाट में पापी बला काज करब! से सब नै हैत चलै चलु बाबा दरबार में." मुदा मोहन के मोन ओहि कोठे पर टिंग गेल छल. बाजल जे "ठीक छै मीता. तखन एना करै छि जे अहाँ कीर्तन में भेने आउ हम ता गणिका के एत  लहरिया लुटैत छि. भोर में अहाँ हमरा सामने जे पूल बनि रहल अछि एहि तर में भेंट हैब फेर संगे घर चलब." अमित बजलाह जे जौं अहाँ के यैह विचार यैह सही, तखन हम बढ़ैत छि."  कहि बाबा विशवनाथ के मंदिर दिस विदा भेलाह मोहन ओय गणिका के कोठा दिस.

मंदिर पहुंचला के बाद अमित कीर्तन में शामिल भेलाह कीर्तन कराय लगलाह. मुदा हुनकर मोन ओय गणिका के कोठा पर अटैक गेलैन. सामने कीर्तन चलि रहल छल मुदा हुनका आँखि के आगाँ में  ओय कोठा के काल्पनिक दृश्य सब नाचय लागल. मोने मोन अपना आप के कोसल लागल जे ओह! हमहुँ बड़का बूड़ि आदमी छि. ओम्हर मोहना ओय गणिका के एतय लहरिया लुटैत हेतै हम बूड़ि खटहिदास एतय आबि बंगोर खोटैत छि. एहि प्रकार भरी राति अमित के समांग बाबा के दरबार में छल मुदा मोन ओय गणिका के कोठे पर लटकल रहलै.

एम्हर मोहन ओय गणिका के कोठा पर पहुँच गेल मुदा किछुए छण बितला पर ओकर मोन ओकरा धिक्कारै लागल. " जो रे पापी! एहन अधम तूं भेलैं जे चलल छलैं बाबा विश्वनाथ के दरबार लेल पहुंच गेलहि एहि पाप के अड्डा पर. ओम्हर मीता अमित बाबा के दरबार के मनोरम छटा के आनंद लैत हेतै, कत्तेक सुन्दर कीर्तन होइत हेतैक हम पापी एतय मुजरा सुनि रहल छि. हे बाबा विश्वनाथ हमर अपराध के क्षमा करब!" प्रकार मोहन के समांग सगर राति ओय कोठा पर रहलै मुदा मोन बाबा विश्वनाथ पर टिंगल रहलै.

भोरे भेने दुनू संगी ओय पूल के नीचा भेंट भेल जतय दुनू नियारने छलाह. दुनू गोटे भेंट भेला के बाद जखन अपन आपबीति खिस्सा सुनबै छलाह तखने देवयोग सं पूल टूटि गेल कइएक टा लोक संगे इहो दुनू संगी काल के गाल में समा गेला. यमक दूत जखन हिनका सब के लेबय लेल एलखिन मोहन के स्वर्ग दिस अमित के नर्क दिस लय बिदा भेलाह. पर अमित के घोर अचरज भेलैन. दूत से पुछलखिन जे यौ महाराज जखन हम दुनू संगी के रहनाय-खेनाय, हँसनाय-काननाय सभटा एक्कै संगे होय छलै एकटा के स्वर्ग एकटा के नर्क जाय के निर्णय कोना कैल गेल?
पर दूत बजलाह जे देखू मृत्युक समय व्यक्ति के आचरण केहन होइत छैक यम न्याय में एकर बहुत महत्त्व छैक. सुनि अमित के मुर्झायल चेहरा पर ख़ुशी के भाव आबि गेलैन बजलाह "आह! तखन अवश्ये अहाँके किछु धोखा भेल. मोहना राति भारी ओय गणिका के कोठा पर छल अनैतिक काज में लिप्त छल हम राति भरि बाबा विश्वनाथ के दरबार में कीर्तन करै छलहुँ. तै हिसाबे हम स्वर्ग नर्क के भागी अछि" पर यमदूत अट्टाहास करैत बाजल "रौ बाबू, तों भरि राति बाबा के दरबार में छलैं मुदा तोहार मोन ओय गणिका के कोठे पर टाँगल छलौ, मुदा मोहन ओय गणिका के ओतय रहितो भरि राति बाबा विश्वनाथ के स्मरण करैत रहल. रौ प्राणी के मोन जतय रहैत छै ने प्राणी ओतय रहैत छै. मनुक्ख बुद्धिजीवी प्राणी होइत छैक तैं प्रत्यक्ष किछु आर मोन में किछु आर सकै अछि, जानवर सब में विवेक कम होइत छैक तैं ओकरा मोन में वैह रहैत छै जे प्रत्यक्ष देखाई पड़ै छै. तैं मनुक्खक मूल्यांकन हम सब बात से करैत छि जे ओकर मोन-विचार कोन प्रकार के छैक."

इति.

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