Friday, 10 April 2015

के अहां . . . हमरा लेल?

के अहां . . . हमरा लेल?

अहां प्रेरणा छी हमर, जिनका लेल

हम आगां बढि जाय चाहैछि ।

अहां मान छी हमर जिनका होबय सं

हम शान सं जीब पाबैछि ।

अहां शक्ति छी हमर जिनका होबय सं

हम सब अवरोध सं पार पाबैछि ।

अहां अभिलाषा छी हमर, जिनका

हम कयामत धरि पाबै चाहैछि ।

अहां आश छी हमर जिनका पबय हेतु

हम कदम-कदम आगा धरि चलल जाइछि ।

अहां लोरी छी हमरा लेल, जकरा सुनि क

हम चैन के निंद सुतैछि ।

अहां संगीत छी हमरा लेल, जिनक तान

हमर हृदयक स्पंदन में गुंजायमान अछि ।

अहां कल्पना छी हमर, जै पर सवार भ

हम ब्रह्मांड्क यात्रा लेल उत्साहित छी ।

अहां पुष्प छी जकर सौंदर्य आ गंध सं

हमर आत्मा प्रतिपल ताजा होई अछि ।

अहां बसात छी हमरा लेल, जेकर

हर बूंद के हम जनमों सं पियासल छी ।

अहां तपिस छी हमरा लेल, जनिक विरह में

हम दिवा-निशि जड़ैत रहलौं अछि ।

अहां पूर्णिमा छी हमरा लेल, जिनक शितलता

में सदिखन हम नहाय चाहैछि ।

अहां लता छी हमरा लेल जिनका पाश में

हम ताउम्र बन्हाय चाहैछि ।

अहां शिवा छी हमरा लेल, जिनकर भक्ति में

हम डूब जाय चाहैछि ।

अहां प्रार्थना छी हमरा लेल, जे

हम माईक चरण में गाब चहै छी ।

अहां वचन छी हमरा लेल, जे हम

आजीवन निभाब चाहैछि ।

अहां  ज्ञान   छी हमर जेकर अंशु सं

हम दिवानिशि ज्योतिर्मय होबय चाहैछि ।

अहां जान छी हमर जिनका

जानय के हम अभिलाषी छी ।

अहां आत्मा छी हमर  जिनका

हम आत्मसात कर चाहैछि ।

    -  ७ अप्रैल २०१५ 

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