Wednesday, 7 March 2018

तृषा (मैथिली खिस्सा)


हेलो! हँ, की हाल छै? फोन पर दोसर दिस तृषाsक मधुर आवाज छल
'ठीक छी. अहाँ कहु' अविनाश प्रतिउत्तर में बाजल छलाह.
"अच्छा सुनु ने, अहाँ जे कहने छलौं जे रवि दिन हमरा जीआईपी घुमाब ल जाय चाहैत छी से हम नै आबि सकब. से की अहाँ हमरा काल्हिखन लाजपत नगर मार्केट ल क चलि सके छी? " कुशल-क्षेम क औपचारिकता के बाद तृषा बजलीह.
"मुदा अहाँक बर्थडे त रवि दिन अछि की ने! आ हमर छुट्टियों. काल्हि त हमर ऑफिस रहत. "
"नै नै, रवि दिन हमर घर में पाहुन सब औथिन तैं हम नै आबि सकब. अहाँक ऑफिस त नेहरूए प्लेस में अछि, कनि काल के लेल छुट्टी ल क त आबिए सके छी." तृषा प्रतिउत्तर में बाजल छलीह.
"चलु ठीक छैक, हम आबि जायब." अविनाश तृषा सँ भेंट करै के इ अवसर छोड़ै नै चाहै छलाह तैं अनमनायल  मोनसँ इ बजलाह.
"चलु तखन डन रहलै काल्हि एगारह बजे हँ, राखै छी बाय." इ कहैत ओम्हर सँ फोन काटि देल गेल छल.
आ अविनाश काल्हिखन ऑफिस में की बहाना बनायब, तृषा संगे कत कत घुमब की की कीनब, की की खायब, की की गप्प करब, ओछाओन पर पड़ल-पड़ल यैह सब सोचैत नींद परि गेल छलाह.
अगिला दिन ओ ऑफिस सँ जल्दिए बंक मारि क लाजपत नगर बस स्टॉप पर पहुँच गेल छलाह. ओत्त आशा-बेरिया तकैत तकैत दू बार फोन क चुकल छलाह तृषा के आ ओ सब खन एक्कैटा जवाब देने छलीह जे हैया दू मिनट में पहुँच रहल छी.
ओह! सॉरी सॉरी, बेसी काल इंतज़ार त नै कर पड़ल ने? उफ्फ! कत्तेक कड़गर रौद छैक, हमरा त आबहो के मोन नै होय छल, अब चलु झट द रिक्शा क लिय...बस सँ उतरैत देरी तृषा मुंह बनबैत एक सांस में इ सब बाजि गेली.
'ठीक..इ बजैत अविनाश ठामे ठाढ़ एकटा रिक्शा केलाह आ दुनू गोटे ओय पर चढ़ि के विदा भेलाह.

"चलु पहिने कत्तौ चलि के किछु खाय छी" खेबा-पियबा के क्रम में किछु गप्प-सरक्का हेतै इ सोचैत अविनाश इ बाजल छलाह. मुदा तृषा बात कटैत बजलीह.. "अरे नै हम घर सँ जलखै क के चलल छी. पहिने चलु चलि क हमर गिफ्ट दियाउ."
ठीक छै चलु तखन पहिने सैह सही...अविनाश मोन मारैत बजलाह.
"चलु ओय दोकान में चलै छी, ओ लहंगा चुनरी के स्पेशलिस्ट दोकान अछि...इ कहैत तृषा अविनाश के हाथ  पकड़ने एकटा दोकान दिस झटैक के जाय लागल छलीह.
तृषा के हाथsक स्पर्श सँ अविनाश केर रोम रोम स्फुरदीप्त भ गेल छल.
दोकान में पहुंचला पर तृषा एकटा सेल्समेन के कहली जे भैया एकटा निम्मन सूट देखाउ.
"इ देखु अनारकली, इ पटियाला सूट, इ हिना सूट, इ चूड़ीदार, इ फ्रॉक सूट ....." सेल्समैन हिनका दुनू के भाँती भाँती के सूट देखाबय लगलैन.
"इ दिवागर अछि, अहाँ के केहन लगै य ?" एकटा सूट छाँटि क तृषा अविनाश के पुछलखिन.
"अहाँके पसिन्न परल त नीके हेतैक" अविनाश एक नजैर सूट दिस दैत सर्द आवाज में बाजल छल.
"इ पर्पल बला सेहो बड्ड दिवगर लगै अछि, मोर्डर्न स्टाइल में छैक. की हम इहो ल ली?" बिहुँसैत तृषा अविनाश से बजली.
"ठीक छै, ल लिए" अविनाश भावुक स्वरे बजलाह.
"देख लिए फेर इ नै कहब जे मुंहझौसी खर्चा करा देलक" उतराचौरि करैत तृषा बजली
"ईह भायजी के करेज बड्ड नम्हगर छैन, मैडम अहाँ पाईsक फिकिर किएक करै छी, सेल्समैन सह दैत आ खरीदारी के लेल प्रेरित करैत बाजल छल.

"अरे कोनो बात नै छैक अहाँ ल लिए ने. श्रीमान इ कतेक टाका के छैक? दुनू केसंयुक्त रुपे सम्बोधित करैत अविनाश बाजल छलाह.
"इ अनारकली बला आठ हजार के आ इ पर्पल वाला मोर्डर्न सेट मात्र चारि हजार टाका के अछि" सेल्समैन दामक हिसाब लगबैत बाजल.
"हौ भाय डिस्काउंट कतेक देबहक?" तृषा मोल-जॉल करैत बजलीह
सेल्समैन बाजल जे डिस्काउंट कैये के बजलहुँ अछि मैडम जी. एम्हर तृषा ओ सेल्समैन से मोलजोल करय लगली आ ओम्हर अविनाश मोने मोन पाईsक हिसाब लगाबय लागल छल - जेबी में मिला जुला के चारि हजार टाका छल आ डेबिट कार्ड में तेरह हजार! चलु डेबिट कार्ड से लाज त बाँचि जायत. बांकी आगा कोना के गुजारा कैल जेतै से बाद में सोचल जेतैक.
डेबिट कार्ड से पेमेंट क के दुनू कपड़ा पैक कराक दुनू गोटे ओतय स बहरायत गेलाह. आगा बाजार में घुमैत तृषा बजली जे सुनु अविनाश एकटा बात कही?
दू टा ने कहु हम त यैह चाहै छी जे अहाँ बजैत रही आ हम सुनैत रही.
"अच्छा सुनु ने अगिला मास में हमर भाय के बर्थडे छैक ओकरा लेल एकटा शर्ट लेबाक अछि"
त ल लिए ने अविनाश धखायत बाजल.फेर एकटा दोकान में जा ओ एकटा शर्ट पसंद केलीह. अविनाश दुकानदार से पुछलक  यौ सर इ शर्ट कतेक के भेल.. ओ कहलक पांच सै टाका के.
"ठीक छै एकरा पैक क दियौ" दुकानदार के एकटा पांच सैया नमरी दैत अविनाश बाजल.
"एकटा अहुँ अपना लेल ल ने लिए" तृषा आवेश देखबैत अविनाश से बजलीह.
अरे नै नै हम पछुलके मास में दू टा शर्ट किनने रही (अपन हिल गेल बजट के अनुमान लगबैत अविनाश इ बहाना बनौने छलाह)
'ठीके छै जेहन अहाँक इच्छा तृषा इ कहैत शर्ट के पैकेट ल बिदा भेलीह.
आगा एकटा चश्मा बला धुप चश्मा बेच रहल छल.
 "हेरे इ कतेक पाई में देबहिक" तृषा एकटा गॉगल्स उठबैत ओय छौड़ा से पुछलक.
"सात सै के माल मात्र तीन सै में ल लिए ने दीदी" छौड़ा बाजल
"ईह! डेढ़ सै में देबहिक त बाज" तृषा ढीठियाबैत बजलीह.
नै दीदी अहाँ लेल दू सै लगा देब.
"अरे छोरु ने रह दियौ ..बीच में अविनाश बाजल
अच्छा चलु ल लिए ड़ेढे सै में ... चश्मा बला छौड़ा धकमकायत बाजल आ चश्मा पैक क के देबय लागल. अविनाश जानै छलाह जे ऐ चश्मा के औकाइत सै टको नै छैक, मुदा ऐ समय में ओ अपन हिनस्ताय नै चाहै छलाह स्वाइत ओ चुपचाप चश्मा बला के डेढ़ सै टका थम्हा देलाह.
अब अविनाश के बड्ड जोरsक भूख लागि गेल छल. आई ओ घर से जलखैयो क के नै चलल छलाह, आ खरीदारी के चक्कर में तृषा से फुर्सत से किछु बतिआयलो नै छलाह, तै ओ तृषा के कहलखिन जे "तृषा चलु अब कतौ बैस के किछु खाय छी"
"अरे नै नै माँ बाट जोहैत हेथिन. हम दुइए घंटा में घुरि आयब कही के चलल रही. हमरा भूखो नै लागल अछि, आ गप्प सरक्का त बादो में होइते रहत. तैं आब अपना सब के चलबा के चाहि." तृषा प्रतिउत्तर में बजैत बाहरक रस्ता दिश घुमय लगली.
"अच्छा ठीक छै, जौं अहाँsक यैह इच्छा अछि त यैह सही" मिझायल मोन सँ अपन भूख आ इच्छा के जाँतैत अविनाश बाजल.
"हौ टेम्पू बला भैया, गणेश नगर चलबहक की?..हं हं अक्षरधाम मंदिर के बगले में छैक."...अरहाई सै टका लागत मैडम....ईह! दू सै टाका में १३ टा टेम्पू बला रेडी भ जायत चलय लेल. दू सै टाका देबह चलह बुझलाहक ने... टेम्पोबला के लगभग धकियाबैत आ अधिकार देखबैत तृषा ओकर टेम्पू में बैसय लगली.

"अरे अविनाश, सुनु ने अहाँके संग में दू हजार के खुदरा अछि की, हमरा लग खाली दू हजारी के नोट अछि"
"कोनो बात नै छैक हम पाई द दैत छियै, इ कहैत अविनाश टेम्पोबला के अपन पर्स से दू टा नमरी निकाली के थम्हा देलक. फेर तृषा दिस ताकि के बाजल जे सुनु तृषा अपन सब के बिआहsक गप्प घरबइया सब से कहिया करबै?

"उँह. ऐ विषय में बाद में बात करै छी ने, अहाँ एतेक ओगताई किएक छी!" इ कहैत तृषा टेम्पू में बैस गेली आ टेम्पू आगाँ बढ़ि गेल. अविनाश ओय टेम्पू के जाइत एक टक्क निहाइर रहल छलाह, जे धीरे-धीरे धुंधला होइत किछ काल में आँखि से ओझल भ गेल छल..!

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